Sunday, September 29, 2019

बिहार - एक उम्मीद में

पिछले काफी दिनों से बिहार में रेड अलर्ट है। भारी बारिश से बिहार में जनजीवन कितना भयावह हो गया है, ये बताने की जरूरत नही है। लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। मीडिया खामोश है। बाढ़ में मुंबई,केरल,चेन्नई और बड़े शहरों को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता करने वाले देश के ढनाढ्या लोग आज बिहार की त्रासदी पर क्यों खामोश हैं, पता नहीं चल पा रहा है। आलम तो ये है कि बिहार के मुख्यमंत्री भी इसे  किस दृष्टि से देख रहे हैं,पता नहीं चलता है। उन्होंने इस स्थिति का ठीकरा कुदरत पे फोड़ा है। प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रहा है। लोगो के पास खाने को नहीं है, रहने को नही है और पूरा देश तमाशा देख रहा है। वैसे भी देश को बिहार में तमाशा देखने की आदत सी हो गयी है। गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी जैसी स्थिति को बरकरार रखने के लिए बड़े बड़े लोग परिश्रम करते है, ताकि उनका घर तरक्की करे।
 बिहार के लोगों और बिहार को तुच्छ दृष्टि से देखने वाले ,हसने वाले और गाली देने वाले लोगों से मेरा यही कहना है कि बिहार में भी इंसान रहते हैं जिनकी जरूरते आपकी तरह है। बिहार को कबतक मदारी समझते रहियेगा। कुछ कीजिये बिहार के लिए। बाकियों के लिए तो आपका प्रेम उमड़ के आता है, तो बिहार के लिए क्यों नहीं आता? बिहार को भी आपकी जरूरत है।
एक बात मुझे आज तक समझ नहीं आयी कि बिहार क्यों ऐसे है? अगर हमारे परिवार का कोई भी सदस्य बीमार या परेशान रहता है तो परिवार के बाकी लोग भी परेशान हो जाते हैं। वे उसे ठीक करने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं। अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ते। हमारे देश में ऐसे बहुत लोग और नेता मिलेंगे जिन्हें बिहार एक बीमारू राज्य लगता है।वो बोलेंगे, बिहार में ग़रीबी है, भुखमरी है बेरोजगारी है और पता नहीं क्या क्या है बिहार में। तो मैं पूछना चाहता हूँ कि कबतक ये कहते रहेंगे। अगर ऐसी समस्या है और आपको पता है तो फिर आप कर क्या रहे हैं। जो बात आप कई दशकों से कर रहे हैं, आज भी वही कर रहे हैं। फिर आप क्या सोच रहे हैं कि आपके कहने से समस्यायें खत्म हो जायेंगी? क्यों नहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकार एकजुट होकर इस बीमार,बेकार,पिछडा जैसे TAG को हमेशा के लिए खत्म करती हैं। सरकार और प्रशासन चाहे तो कुछ भी संभव है। बाकी राज्य भी तो प्रगति कर रहे हैं, फिर बिहार क्यों नहीं कर सकता? बस जरूरत है पक्षपात नहीं करने की। अगर अभी से भी बिहार पर ध्यान दिया जाय तो बिहार की हालत संभल सकती है, सुधर सकती है। फिर किसी को कहने का मौका नहीं मिलेगा की बिहार एक पिछडा राज्य है ।
                                                                 .. . .. . .. . .. . .. . . .. . .. . .. . .. . .. . . . .. . .. . .. एक बिहारी

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